Wednesday, December 29, 2010

देखो सच बताना.....

देखो सच बताना.....

तुम जब मुझको पढ़ती हो......तो तुमको लगता नहीं है.....कि ये कुछ कहना चाहता है...लेकिन कह नहीं पा रहा  है.... ...........देखो सच बताना.....


तुम अपने आप को पाती नहीं हो......मेरे हर शब्द में........देखो सच बताना.....


तुम जब मुझको पढ़ती हो.....तुमको लगता नहीं है....कि तुम भी प्यार करने लगी हो......देखो सच बताना.....


तुमको इंतज़ार नहीं रहता है.....मेरा.......देखो सच बताना.....


तुम जानती हो कि मैं क्या वरदान चाहता हूँ.....लेकिन तुम फिर भी जानना चाहती हो.....देखो सच बताना.....


तुम भी मेरे प्रेम कि लहर मे बह जाना चाहती हो........लेकिन मकान खाली नहीं है....कह के किनारा कर लेती हो.....देखो सच बताना.....


तुम जानती हो कि हमारे दिल एक दूसरे कि बात कहते हैं......लेकिन तुम इकरार नहीं करना चाहती हो...देखो सच बताना.....


तुम प्रेम कि देवी हो...और मैं प्रेम का भिक्षुक...तुम वरदान में प्रेम दे सकती हो...... लेकिन ........देखो सच बताना.....

1 comment:

वन्दना said...

सुन्दर भाव भरे हैं……………मगर प्रेम भिक्षा मे नही मिलता…………प्रेम मे सिर्फ़ मिटा जाता है मांगा नही जाता......