Saturday, February 19, 2011

तुम से मना किया था न....

तुम से मना किया था न....

तुमको समझाया था , न.....की उससे दूर रहना....उसको छूत की बीमारी है.....गाँव वाले यूँ ही तो उसको उलटा सीधा नहीं कहते.....उसको यूँ ही तो गाँव से नहीं निकाल दिया......लेकिन चलो ...अच्छा हुआ...की तुम ने खुद अनुभव कर लिया और राहें जुदा कर लीं......वो है ही नहीं....सभ्य और अभिजात्य   समाज मे रहने लायक......अब तुमको भी इस बात का एहसास हो जायेगा...की उसके यहाँ से चले जाने में.....कितना सुख और शान्ति है.

जी..... मैं सतीश के बारे में ही बोल रही  हूँ.....अब आप ने देखा....उसका क्या चरित्र है.....? अरे ऐसे आदमी को सूली पर लटका देना चाहिए....और वो भी चौराहे पर....ताकि भविष्य में कोई भी इस छूत की बीमारी से ग्रसित न हो...... आप ने अपना status  देखा है...न Mrs. Sharma. ....ठीक है मन से वो आप से कुछ attach  हो गया था....लेकिन....पैरों की धूल क्या माथे  पर लगाई जा सकती है......जो जो कदम आप ने उठाये हैं...इस छूत की बीमारी से बचने के लिए......मैं आप के साथ हूँ.....जब आँख खुले, तभी सवेरा...........रही बात उसकी.......तो क्या आप ने उसकी ज़िन्दगी का ठेका ले रखा है...? अरे ....जाने दीजिये न.....कितने ही इस तरह लोग रोज़ पैदा होते हैं...रोज़ मरते हैं..... ख़ाक डालिए.

अब आप ही देखिये....कितनी खुश और स्वस्थ्य दिख रहीं हैं आप...और हैं आप.....अरे, जिसका ख्याल भी मन मे....बीमारी पैदा कर दे....उस से तो मीलों की दूरी अच्छी.....वो कुछ दिन तड़पेगा, परेशान होगा.....फिर एक दिन शांत हो कर.....इस जमीन की खुराक हो जायेगा......कम से कम एक चरित्रहीन तो इस दुनिया से कम होगा.....मुहब्बत करता है..............दूर रहिये उससे.....         

और सुनिए .....अभी न छेडिये जिक्रे मुहब्बत, जलाल्लोदीन अकबर सुन रहे हैं...... 

2 comments:

वन्दना said...

ये क्या गज़ब् कर दिया
छूत का रोग बना दिया
हाय री मोहब्बत !
सबने रुसवा कर दिया
कभी मोहब्बत करके देखा होता
सबमे खुदा नज़र आया होता
फिर ना ये इल्ज़ाम लगाया होता
चरित्रहीन हूँ मैं………………………
क्योंकि मोहब्बत की है मैने

अब इसके बाद क्या कहूँ?…………
सिर्फ़ यही मोहब्बत को इल्ज़ाम मत बनाओ

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

नाइस!