Tuesday, March 23, 2010

हमको फिर एक विवेकानंद चाहिए

बहुत डांट पड़ी, बहुत ताने सुनी इस बात पर की मै ब्लॉग अपने उपर या सुंदर लाल के उपर ही क्यों लिखता हूँ. सामाजिक समस्याओं के बारे मैं क्यूँ नहीं लिखता हूँ. मै कहता हूँ किस समस्या के उपर लिखूं? अकेला चना भाड़ तो नहीं फोड़ सकता है. रुपयों की माला के उपर लिखूं या पुलिस अधिकारी ने जो बलात्कार किया उसके उपर लिखूं? नेताओ के उपर लिखूं या IPL मै बह रहे पैसे के बारे मैं लिखूं? सब के उपर हमारे मीडिया ने आँख गड़ा ही रखी हैं. फिर भी क्या हो गया.

हम भारतीयों की एक कमजोरी को सारे राजनेता बखूबी जानते हैं कि ये कुछ दिन तक हल्ला मचाती है फिर शांत हो जाती है या आश्वासन कि एक रोटी इसके सामने फ़ेंक दो, ये दुम हिलाने लगती है. कुम्भकरण तो ६ महीने ही सोता था, लेकिन हम लोग सोते ही रहते हैं. हम कब जागेंगे, ये तो भगवान् भी नहीं जानता. रोज़ सवेरे हमारी आँख खुल जाती है, और हम अपने अपने काम मे लग जाते हैं, इसको अगर हम जागना कहते  हैं, तो भगवान् भी हमारी सहायता नहीं कर सकते. 

जिस देश मे कसाब जैसे आतंकवादी को बचाने के लिए भी वकील तैयार हो, वहां का राम भी रखवाला होने को तैयार नहीं होगा. जहाँ रक्षक ही भक्षक बन गए हो, वहां मै अकेला क्या कर लूंगा.

क्या कोई अंत है इसका??? जब तक कोई ऐसा इंसान न पैदा हो जिसमे आत्मा को झकझोर ने कि काबलियत हो, हम नहीं जगने वाले.

ऐ- काश बरस जाये यहाँ नूर कि बारिश ,
ईमान के आइने पे बड़ी गर्द पड़ी है.

हमको फिर एक विवेकानंद चाहिए.

3 comments:

कृष्ण मुरारी प्रसाद said...

विवेकानंद तो चाहिए ही...कैसे ?....यह एक बहुत बड़ी पहेली है....
...............
आज मैंने नानी-दादी की पहेलियों को याद किया............
......................
विलुप्त होती... नानी-दादी की बुझौअल, बुझौलिया, पहेलियाँ....बूझो तो जाने....
.........मेरे ब्लॉग पर.....
http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_23.html
लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से.

Shikha Deepak said...

अब यहाँ एक और सवाल यह भी है कि अगर विवेकानंद फिर आजायें तो क्या हम सुधर जायेंगे।

JHAROKHA said...

bahut hi sach baat kahi hai aapane mai aapki baat se sahmat hun.do laine kahana chahungi--------

insaan kahan rahate hain koi to batao
ye jo dikhate hain,vo to maati ke hain putale,
inmen imaan kahan rahata hai,
koi to bataao.