Wednesday, December 21, 2011

प्रेम-2

आनंद.....कब तक चुपचाप कोई जले ?

ज्योति.....इसकी कोई सीमा नहीं है.

अच्छा आनंद...एक बात सच सच बताना.....

बोलो......वैसे भी मैं झूठ नहीं बोलता.....

तुम्हारी जिन्दगी में  मेरा स्थान क्या है......

ज्योति.....ये सवाल तुमको पूंछना पड़ रहा है....????

मुझे गलत मत समझना आनंद.....

अरे नहीं....ऐसा नहीं है.

ज्योति...ये बहुत कठिन और आसान सवाल है..कठिन इसलिए....क्योंकि कुछ लोग किसी की जिन्दगी में वो स्थान रखते हैं ....जो परिभाषित नहीं किया जा सकता. जिसको शब्दों में बांधने की कोशिश उस इंसान के साथ अन्याय होता है.....और आसान इसलिए...की तुम मुझ पर विश्वास करती हो..तो में जो कुछ भी कह दूंगा..तुम मान लोगी....हाँ अगर वो अतिशोयोक्ती न हो....है कि नहीं......

तुम बोलो आनंद......

क्या बोलूं....ज्योति.....अब अगर हवा इंसान से पूंछे कि उसके जीवन मे उसका क्या स्थान है...या खुशबू अगर फूल से पूंछे कि उसके लिए खुशबू का क्या महत्व है...तो बताओ कोई जवाब दे तो क्या दे....तुम्ही बताओ...मैं कुछ  भी भूला नहीं हूँ....किन किन और जिन जिन हालातों से मैं गुजरा हूँ.....उसमें तुम्ही थीं जो मेरे साथ खड़ी थीं....जिसका विश्वास मेरे उपर से तब भी नहीं डिगा, जब मैं टूट कर बिखर रहा था.....अब और क्या बताऊँ......

आनंद....तुम मुझे आसमान पर मत बिठाओ.....मैं क्या थी और अब क्या हूँ...ये सिर्फ मैं जानती हूँ..और जो मैं हूँ...इसको बनाने में या पुनर्जीवित करने में तुमने कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी..में तो अपना वजूद ही भूल गयी थी......

अब तुम मुझे आसमान पर मत बिठाओ...ज्योति....कुछ gifts जो भगवान् हमे देता है, वो मर नहीं सकतीं....वो खत्म नहीं सकतीं...हाँ उनकी आंच ठंडी हो सकती है.....मैने सिर्फ वही किया....

वही मनुष्य है कि मनुष्य के लिए मरे....

 लेकिन ये रिश्ता.......

कुछ  रिश्ते बेनाम होते हैं......लेकिन सब से खुबसूरत होते हैं.....गमले में लगा गुलाब देखा है ना....कभी किसी जंगले में जा कर जंगली गुलाब को भी देखो....कैसा हवा के साथ लहराता है, इठलाता है, लचकता है...वो खूबसूरती गमले के गुलाब में नहीं होती...मत दो हर रिश्ते को नाम....

अच्छा अब अगर में ये पुंछु कि मेरा क्या स्थान है.......तो.....

हूँ......सोचना पड़ेगा....


1 comment:

वन्दना said...

प्रेम के मोडो से गुजरती कहानी खुद को सार्थकता तक ले जा रही है।