Thursday, July 8, 2010

बाँध.

मानसून का आगमन, सावन का महीना, काले मेघों से घिरा आसमान किसका मन मयूर नहीं नाच उठेगा. मैं भी बारिश के मौसम मे घर के पास बहती हुई अलकनंदा नदी के पास जाकर बैठता हूँ और उसकी पागल हुई लहरों को देखता हूँ. मेरे मन मे ये विचार जरूर कौंधता है की अच्छा हुआ जो साहित्यकारों ने मन की तुलना किसी नदी से नहीं करी. मन को सागर कहा. क्योंकि सागर मे बाढ़ नहीं आती , सागर पे बाँध नहीं होता.

गंगा खतरे के निशाँ से उपर जा सकती है, घाघरा किनारे तोड़ सकती है, ब्रहमपुत्र बांधो की परवाह नहीं करती , लेकिन इस मन का क्या करूं....... अच्छा है न.......... मन कोई नदी न हुई. अगर मन बाँध तोड़ने की कोशिश करे तो? करता भी है. लेकिन जब मन का बाँध टूटता है तो बाढ़ नहीं आती , फिर सुनामी आती है. जो तबाही तो लाती ही है लेकी एक नए शुरुआत का सिरा भी साथ लाती है. मन विचलित होता है, बहकता है, लेकिन मेरी बात सुनता भी है. हम दोनों मे.... मुझमे और मेरे मन मे ये समझौता है. कभी कभी यूँ भी होता है.............

मन को बाँध मत................ मन को वश मे कर. काश मे वो अवस्था देख पाऊं या हासिल कर पाऊं की जो मै कहूँ , वो मन करे. न की जो मन कहे वो मै करूँ. कभी मन व्याकुल होता है तो कभी बेचैन और हाँ जब ये शांत होता है..................... तो दुनिया सुंदर लगती है. सब जगह उसका निवास दिखाई पड़ता है. सब जगह वो ही वो दिखाई पड़ता है. रे मन............... तू क्यों नहीं उसकी याद मे डूब जाता ........... जिसको प्रियतम कहते हैं.

कहाँ तक बांधू कहाँ तक बाँध बनाऊं. जब सब्र की नदी टूटती है तो कोई बाँध नहीं रोक सकता. नहीं , नहीं ........ मन ऐसा मत कर. तू तो देख मेरा है न, क्या इतनी भी नहीं सुनेगा मेरी. तूने ही तो मुझको मुझसे मिलवाया था अब फिर मुझको छोड़ रहा है. तू किसके लिए व्याकुल है........... वो जो तेरा है ही नहीं? तेरे पास तो वो असीम शक्ति है जो तुझको एक पल मे ब्रह्माण्ड के एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाने मे सक्षम है. तू निराशा मे आशा है , निर्जीव मे जीवन है.

मेरे मन................ राधा भी तो कृष्ण की न हो सकी, लेकिन दुनिया कृष्ण का नाम बिना राधा के तो नहीं लेता. राधा मन से कृष्ण और कृष्ण मन से राधा हो गए .............. मन तू क्या है.

क्या मैं मन पे बाँध बांधूं........? जा....... समां जा उसमे और उसका हो ले. वही तो जीवन है. तू तो सब मे है. उसके पास भी तो मन होगा........ काले काले मेघों का जादू उसपे भी तो होता होगा.......?

आज फिर दिल ने कुछ तमन्ना की, आज फिर हमने दिल को समझाया. .   

1 comment:

वन्दना said...

बेहद खूबसूरत चित्रण्……………एक बार एकाकार हो जाये तो फिर मन बचता कहाँ हैं?