Thursday, August 5, 2010

जी बहुत चाहता है सच बोले

विश्वासघात.......... आप ने अविश्वास्घात सुना है? नहीं सुना होगा, क्योंकि ये होता ही नहीं है.  अविश्वास्घात तो केवल मूर्ख ही करते हैं. समझदार तो विश्वासघात करते हैं. अरे.... नहीं मै कोई व्यंग या तानाकशी नहीं कर रहा हूँ, सच  बोल रहा हूँ. मै अपने दोस्तों मे ज्यादा लोकप्रिय नहीं हूँ, क्यंकि मुझे सच बोलने की आदत, तो नहीं कह सकता, पर बीमारी है. और इसका पूरा भुगतान मैने किया है. जी हाँ सच बोलने का भुगतान...............

प्यार किया...........? ये सवाल किया गया

हाँ....... ये जवाब था. और क्या कहता कि नहीं किया. 

इसको सूली पर लटका दो. ............. ये फैसला था.

मंजूर है..............क्योंकि मैं ललो-चप्पो नहीं कर सकता.

आगे से ऐसा कुछ नहीं करोगे...... वर्ना..... एक धमकी भरा स्वर.

जी............. मन मे सोच कि क्या नहीं करूंगा, ये भी बता दो. प्रेम तो ह्रदय का स्वभाव है.

खैर........ जी बहुत चाहता है सच बोले , क्या करें हौसला नहीं होता. सच बोलने मे का डर नहीं है, सच को बर्दाशत करने का कलेजा सब के नहीं होता. वो अंग्रेजी मे कहावत है................ "if you want to make somebody angry , lie. If you want to make him more angry, tell the truth." अब आप ही राय दें , कि मै क्या करूँ? 

अगर आप इज़ाज़त दें तो जगजीत सिंह साहब कि मशहूर नज़्म को उद्धत करना चाहूँगा........

सच्ची बात कही थी मैने, लोगों ने सूली पे चढ़ाया,
मुझको  जहर का जाम पिलाया, फिर भी उनको चैन न आया.

विश्वासघात तो एक कला है, पता नहीं लोग इसको गिरी हुई नज़रों से क्यों देखतें हैं. जूडास ने कितनी खूबसूरती से ईसा मसीह का हाँथ चूम कर, दुश्मनों को ये बताया था, कि १२ लोगों मे ईसा मसीह कौन हैं. मै जिसके हाँथ मे एक फूल दे के आया था, उसी के हाँथ का पत्थर मेरी तलाश मे हैं. लोग कहते हैं वक़्त के साथ चलो, और सही भी है. तो विश्वासघात तो आज कल का चलन है.

ईमानदार............ को तो लोग शक कि निगाह से देखतें हैं.  उसे outdated , दकियानूस तरह-तरह के नामो से सजाया जाता है. ईमान तो सिर्फ बेईमान रखते हैं आज कल.   

लेकिन.............. उपर वाले कि लाठी मे आवाज़ नहीं होती. ऐसा मैने सुना है.

आप ने सुना है......................

3 comments:

वाणी गीत said...

ईमानदार............ को तो लोग शक कि निगाह से देखतें हैं. उसे outdated , दकियानूस तरह-तरह के नामो से सजाया जाता है. ईमान तो सिर्फ बेईमान रखते हैं आज कल....
सही कहा है आपने ...
मगर सिर्फ सुना नहीं है कई बार देखा भी है कि कोई ऐसी शक्ति है जरुर जो पूरा हिसाब किताब रखती है ..
विश्वास बनाये रखें खुद में ...!

वन्दना said...

एक कटु सत्य कह दिया मगर सबके गले से नीचे कब उतरता है सच्……………एक बहुत ही प्रेरणादायी लेख्………………सच जैसा।

JAGDISH BALI said...

Thought provoking stuff !