Friday, September 17, 2010

अल्लाह...... सुभान अल्लाह......

क्या फ़रमाया आपने...... ? एक सवाल

हुज़ूर .... फ़रमाया नहीं... इल्तिजा  है......

आप का इल्तिजा करने का सलीका , दिलकश है.... कोई मना कर ही नहीं सकता. आज कल के  नौ-निहालों को  ये सलीका कौन सिखाये....

बस करिए.... खुदा के लिए बस करिए..... आप तो जरा - जरा से बात पर तारीफों के पुल बाँध देते हैं.

आप किसी बा-इज्ज़त  खानदान की लगती हैं.... अगर बुरा ना माने तो आप से तारुफ़ की गुजारिश  कर सकता हूँ?

मेरा नाम मुहब्बत है.........

वल्लाह..... नाम से ही चाशनी टपकती है...... खुदा बुरी नजर से बचाए. चश्म-ए-बदूर.

मियाँ आप का तारुफ़.....? मुहब्बत का जायज सवाल.

मुझे दर्द कहते हैं.......

सुभानअल्लाह....

दर्द और मुहब्बत का चोली दामन का साथ है.......

जी... बजा फ़रमाया आपने..... इतिहास गवाह  है.

कुछ अजीब सा लगता है ना......

चोली दामन का साथ है.... लेकिन फिर भी तारुफ़ की जरुरत पड़ती है.

जी..... वो तो है..... क्योंकि दुनिया मुहब्बत तो चाहती है और दर्द से किनारा , इसलिए अकसर  हम लोगों को खुद अपना तारुफ़ करवाना पड़ता है.......

एक बार किसी ने मोमबत्ती से पूंछा की तुम जलती हो आंसू क्यों बहते हैं........

मोमबत्ती ने कहा " जब कोई अपना जलता है तो तकलीफ तो होती ही है".

जी..... ये तो है.

आँखों मे आंसू हैं, रोने की तमन्ना दिल मे है,
इक कदम मंजिल से बाहर, एक कदम मंजिल में  है,

क्या कहतीं हैं आप....

सही कह रहे आप......

लेकिन मुझे आप से शिकायत भी है......

मुहब्बत से शिकायत ....... अल्लाह.... आप पहले इसान होंगे. बोलिए  तो  ..... क्या खता हो गयी मुझसे.

आप ने दर्द पर इतनी सारी बंदिशें क्यों अता फरमाई? मुँह से आह ना निकले, आँख से आंसू ना बहे.

जो आके रुके दामन पे सबा, वो अश्क नहीं है पानी है.
जो अश्क ना छलके आँखों से , उस अश्क की कीमत होती है.

आप ने शायद ये नहीं सुना.....

सुना है उसको मुहब्बत दुआएं देती हैं,
जो दिल पे चोट तो खाए, मगर गिला ना करे.

आप की भूल जाने की आदत है क्या....... मुहब्बत का सवाल?

क्यों भला.....?

मैने अभी तो आप से कहा की मुहब्बत का दर्द से चोली दामन का साथ है. ....... आप हैं तो हम हैं.

आप लाजवाब करने मे तो महारत रखतीं हैं..... बाखुदा.

हाय  ..... अल्लाह........ मै तो ये दावा भी कर सकती  हूँ.....कि जो दर्द ना बर्दाश्त कर सके..........मुहब्बत से दूर  ही रहे.

अल्लाह...... सुभान अल्लाह......

2 comments:

Akanksha~आकांक्षा said...

कि जो दर्द ना बर्दाश्त कर सके..........मुहब्बत से दूर ही रहे.
अजी ठीक ही तो फ़रमाया...
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'शब्द-शिखर' : एक वृक्ष देता है 15.70 लाख के बराबर सम्पदा.

वन्दना said...

बहुत सुन्दर आलेख्………………
जो मोहब्बत होगी तो दर्द होगा
बिना दर्द मोहब्बत बेमानी है