Thursday, November 15, 2012

तस्वीरें बोलती नहीं हैं .....

आज फिर कलम हाँथ में आई ......तो नाम तुम्हारा ही लिख गया . अब बताओ इसमें मेरा क्या कसूर है .....बोलो न .....अब बोलो तो ....

अभी तो सर्दी ने पाँव पसारने शुरू ही किये हैं ......लेकिन धुप में गुलाबीपन तो आने लगा है। सुबह की ठंडी हवा इक सिहरन सी भर देती है ....... अब बोलो न, बोलो तो .......

कल शाम हवा का एक झोंका मुझे छूकर गुजरा ..... तो तुम याद आ गयीं।

वो देखो .... अरे यहाँ तो आओ ...... वो देखो .....कोहरे की हल्की - हल्की  चादर ...ऐसा नहीं लगता की जैसे सामने वाले पहाड़ से बदल नीचे उतर कर आ रहे हैं ......ये कहीं मेघदूत तो नहीं .....जो शकुन्तला का कोई संदेशा लाये हो ........बोलो न ......अब बोल भी पड़ों ...

वो देखो जोशी जी के बगीचे में  डेहलिया के फूल कैसे इतरा इतरा कर नाच रहे हैं .......वो नीला वाला डहेलिया  देखो .......कितना खूबसूरत लग रहा है ..............नहीं बोलोगी तुम ना .....बोलो

मुझे जानती हो इन पहाड़ों में सबसे खूबसूरत क्या लगता है ......................बताओ .....अरे हाँ ....तुम तो बोलोगी नहीं ......

पहाड़ों के घरों में ...हर घर में तुमको फूल जरूर मिलेंगें ......

मुझे फूल बहुत पसंद हैं ........

तुमको ......?????

अरे हाँ ......तुम तो बोलोगी नहीं ......क्योंकि तस्वीरें बोलती नहीं हैं .....



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